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बुधवार, 4 मार्च 2015
रविवार, 13 अप्रैल 2014
आई बैसाखी
बैसाखी नए साल के आगमन से जुड़ा है और तो इसका धार्मिक महत्व भी है। दसवें सिख गुरु गुरु गोबिन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना इसी दिन की थी। बैसाखी दरअसल एक लोक पर्व है। फसल तैयार होने के उल्लास में यह पर्व और भी खास बन जाता है। सर्दियों के खत्म होने और गर्मी की शुरुआत के साथ ही लोगों का मन उल्लास से भर जाता है। ऐसे में इसे बदलते मौसम के जश्न के तौर पर भी देखा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, गुरु गोबिन्द सिंह ने वैशाख माह की षष्ठी तिथि को खालसा पंथ की स्थापना की थी। सूर्य मेष राशि में अक्सर 13 या 14 अप्रैल को प्रवेश करता है, बैसाखी इन्हीं दोनों दिनों में से किसी एक दिन मनाई जाती है। सिखों के पहले गुरु बाबा नानक देव ने वैशाख माह को आध्यात्मिक साधना की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण बताया है।
बैसाखी का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी खास स्थान है। रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए बैसाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। जनरल डायर ने निहत्थी भीड़ पर गोलियां बरसाई थीं, जिसमें हजारों लोग शहीद हुए थे। (नभाटा)
बैसाखी पर्व की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ !
- अशोक बजाज
रविवार, 16 मार्च 2014
गुरुवार, 10 नवंबर 2011
बुधवार, 26 अक्टूबर 2011
दिवाली में राम वन गमन मार्ग एवं हाईटेक पटाखें
दीपावली के अवसर पर पटाखों के प्रदुषण की चिंता बहुत लोगों को रहती है . पिछली दिवाली में भी मैनें पर्यावरण रक्षा की अपील की
थी , जिसका काफी असर हुआ था . इस बार भी हम आपके लिए प्रदुषण मुक्त पटाखे
ढूंढ़ कर लाये है . आप इन पटाखों का इस्तेमाल करें और घर के बच्चों को भी
प्रेरित करें . इन पटाखों से बच्चों को दिवाली का पूरा आनंद तो मिलेगा ही
साथ ही साथ पर्यावरण की भी रक्षा होगी . तो अब शुरू हो जाइये और अपने मनपसंद पटाखे पर क्लिक कीजिये . कैसा लगा यह बताना ना भूलें .
(1) एटम बम
(2) रॉकेट
आपको दीवाली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
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